(आपत्ति में पड़ने के कारण) कृषि (द्वारा जीविकानिर्वाह) करने वाला (ब्राह्मण-क्षत्रिय) खेत में स्वयं तिलों को पैदा करके दूसरे पदार्थो के साथ मिलाकर (लाभार्थ) बहुत समय तक नहीं रखकर धर्म (यज्ञ-हवन आदि) के लिए बेच दे।
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