मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 90
काममुत्पाद्य कृष्यां तु स्वयमेव कृषीवलः । विक्रीणीत तिलान्‌ शुद्धान्धर्मार्थमचिरस्थितान्‌ ।।
(आपत्ति में पड़ने के कारण) कृषि (द्वारा जीविकानिर्वाह) करने वाला (ब्राह्मण-क्षत्रिय) खेत में स्वयं तिलों को पैदा करके दूसरे पदार्थो के साथ मिलाकर (लाभार्थ) बहुत समय तक नहीं रखकर धर्म (यज्ञ-हवन आदि) के लिए बेच दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें