न शद्रे पातकं किंचिन्न च संस्कारमर्हति ।
नास्याधिकारो धर्मेऽस्ति न धर्मात्प्रतिषेधनम् ।।
(लहसुन, प्याज आदि अभक्ष्य पदार्थ खाने पर भी) शूद्र को कोई पातक (दोष) नहीं होता; क्योंकि इसका (यज्ञोपवीत आदि) संस्कार नहीं होता, इसे (अग्निहोत्र आदि) धर्मकार्य करने का अधिकार नहीं हे और (पाकयज्ञ आदि) धर्मकार्य करने का निषेध भी नहीं है।
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