तावुभावप्यसंस्कार्याविति धर्मो व्यवस्थितः ।
वैगुण्याज्जन्मतः पूर्व उत्तरः प्रतिलोमतः ।।
(किन्तु उन दोनों में उक्त निर्णयानुसार एक के श्रेष्ठ होने पर भी) पूर्वोक्त दोनों में पहला ('पारशव'- १०।८) प्रतिलोम क्रम से ब्राह्मणी में उत्पन्न होने से दोनों ही यज्ञोपवीत संस्कार के अयोग्य हैं, ऐसा शास्तरनिर्णीत धर्म है।
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