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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 88
अपः शस्त्रं विषं मासं सोमं गन्धांश्च सर्वशः । क्षीरं क्षौद्रं 'दधि घृतं तैलं मधु गुडं कुशान्‌ ।।
जल, शस्त्र (सब प्रकार का हथियार या लोहा); विष, माँस, सोम नामक लतर, सर्वबिध गन्ध (कस्तूरी आदि), दूध, मधु (शहद), दही, घी, तेल, मोम, गुड और कुशा (को आपत्ति काल में भी ब्राह्मण-क्षत्रिय नहीं बेचे)।
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