जिस प्रकार सुन्दर (उपजाऊ) खेत में बोया गया श्रेष्ठ सुन्दर बीज श्रेष्ठ पौधा उत्पन्न करता है, उसी प्रकार आर्य (द्विज) से आर्या (द्विज स्त्री) में उत्पन्न पुत्र सब (श्रौत तथा स्मार्त) संस्कार के योग्य होता है (अत: उक्त पारशव तथा चण्डाल अनार्योत्पन्न होने से संस्कार के योग्य नहीं होते)।
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