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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 94
रसा रसैर्निमातव्या न त्वेव लवणं रसैः । कृतान्नं च कृतान्नेन तिला धान्येन तत्समाः ।।
(गुड आदि) रसों को (घृत आदि) रसों से बदलना चाहिये; किन्तु नमक को किसी रस से नहीं बदलना चाहिये । पक्वान्न (पके हुए-सिद्ध-अन्न को) अपक्व कच्चे-अन्न से तथा तिल को (प्रस्थ परिमाण) धान्य से बदलना चाहिये।
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