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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 58
अनार्यता निष्ठुरता क्रूरता निष्क्रियात्मता । पुरुषं व्यञ्जयन्तीह लोके कलुषयोनिजम्‌ ।।
इस लोक में अनार्यता, निष्ठुरता, क्रूरता, क्रिया (यज्ञ-सन्ध्याव कार्य) हीनता, ये सब नीच जाति में उत्पन्न पुरुष को मालूम करा देती है अर्थात्‌ इन गुणों से युक्त मनुष्य को नीच जाति वाला जानना चाहिये।
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