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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 45
मुखबाहूरुपज्जानां या लोके जातयो बहिः । म्लेच्छवाचश्चार्यवाचः सर्वे ते दस्यवः स्मृताः ।।
ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्यों के (क्रियालोपादि होने से) म्लेच्छ-भाषाभाषी या आर्य-भाषाभाषी जो बाह्य जातियाँ हैं, वे सभी 'दस्यु' कहलाती हैं।
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