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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 64
शूद्रायां ब्राह्मणाज्जातः श्रेयसा चेत्प्रजायते । अश्रेयान्‌ श्रेयसीं जातिं गच्छत्या सप्तमाद्युगात्‌ ।।
ब्राह्मण से शूद्रा में उत्पन्न (पारशव १०।८) जाति की कन्या ब्राह्मण से विवाह कर कन्या उत्पन्न करे (इस प्रकार) वह सप्तम जन्म (पीढ़ी) में श्रेष्ठ जाति को प्राप्त करती है।
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