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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 6
सत्रीष्वनन्तरजातासु द्विजैरुत्पादितान्सुतान्‌ । सदृशानेव तानाहुर्मातृदोषविगर्हितान्‌ ।।
द्विजाति (१०।४) के द्वारा बाद वाले वर्ण की स्त्रियों में (ब्राह्मण से क्षत्रिया में, क्षत्रिय से वैश्या में तथा वैश्य से, शूद्र में) उत्पन्न किये हुए माता के (हीन वर्णवाली होने से) दोष से निन्दित पुत्रों को पिता के समान जाति वाला कहा गया है।
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