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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 73
अनार्यमार्यकर्माणमार्य चानार्यकर्मिणम्‌ । सम्प्रधार्याब्रवीद्धात न समौ नासमाविति ।।
द्विजों का कार्य करने वाले शूद्र तथा शूद्रों का कर्म करनेवाले द्विज का विचारकर "ये दोनों न तो समान हैं और न असमान हैं” ऐसा ब्रह्मा ने कहा है।
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