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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 75
अध्यापनमध्ययनं यजनं यजनं तथा । दानं प्रतिग्रहश्चैव षट्कर्माण्यग्रजन्मनः ।।
(साङ्ग वेदों का) अध्यापन, अध्ययन, यज्ञ करना, यज्ञ कराना, दान देना तथा दान लेना - ये छः कर्म ब्राह्मणों के हैं।
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