सर्व च तान्तवं रक्तं शाणक्षौमाविकानि च ।
अपि चेत्स्युररक्तानि फलमूले तथौषधीः ।।
सब प्रकार के सूत्र-निर्मित और रंगे गये सन, अलसी तथा ऊनके वस्त्र और बिना रंगे हुए वस्र, फल मूल तथा ओषधि (गुडूची आदि दवाओं) को (आपत्तिकाल में भी ब्राह्मण-क्षत्रिय) नहीं बेचे।
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