एते षट्सदृशान्वर्णाञ्जनयन्ति स्वयोनिषु ।
मातृजात्याः प्रसूयन्ते प्रवरासु च योनिषु ।।
ये ६ प्रतिलोमज (नीच पुरुष से उच्चवर्णा स्त्रियों में उत्पन्न) पुरुष अपनी- अपनी जाति वाले, अपनी-अपनी माताओं की जाति, अपने से श्रेष्ठ क्षत्रियादि जाति तथा नीच शूद्रादि जाति वाली स्त्रियों में अपने ही समान जाति वाले हीन वर्णों को उत्पन्न करते हैं।
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