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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 35
मृतवस्त्रभृत्स्वनार्यासु॒ गर्हितान्नाशनासु च । भवन्त्यायोगवीष्वेते जातिहीनाः पृथक्‌ त्रयः ।।
कफन (मृतक का वस्त्र) पहनने वाली क्रूर और (जूठा आदि) निन्दित अन्न खाने वाली 'आयोगव' (२1१२) जाति वाली स्त्रियों में हीन जातीय ये तीनों (सैरित्र, मैत्रेयक और मार्गव) पृथक्‌-पृथक्‌ उत्पन्न होते हैं।
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