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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 108
षुधार्ततश्चात्तुमभ्यागाद्विश्वामित्रः श्वजाघनीम्‌ । चण्डालहस्तादादाय धर्माधर्मविचक्षणः ।।
धर्माधर्म (के गुण-दोष) को जाननेवाले 'विश्वामित्र' मुनि भूख से पीड़ित होकर चण्डाल के हाथ से कृत्ते की जङ्घा के मांस को लेकर खाने की इच्छा किये (तथा उस निषिद्ध मांस भक्षण के खाने की इच्छा से पापदूषित नहीं हुए)।
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