अनुलोम क्रम से (उच्च वर्णवाले पुरुष से नीच वर्णवाली स्त्री में) एक वर्ण के अन्तरवाली स्त्री में उत्पन्न "अम्बष्ठ' (१०।८) तथा उग्र" (१०।९) संज्ञक पुत्र जिस प्रकार स्पर्शादि के योग्य हैं, उसी प्रकार प्रतिलोम क्रम से (नीच वर्णवाले पुरुष से उच्च वर्णवाली स्त्री में, एक वर्ण के अन्तरवाली स्त्री में) उत्पन्न क्षत्ता (१०।९) तथा "वैदेह" (१०।११) संज्ञक पुत्र भी स्पर्शादि के योग्य हैं।
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