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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 7
अनन्तरासु जातानां विधिरेष सनातनः । क्वेयकान्तरासु जातानां धर्म्य विद्यादिमं विधिम्‌ ।।
(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) अनन्तर वर्णवाली स्त्रियो में उत्पन्न पुत्रों का यह सनातन विधान है। एक या दो वर्णो के अनन्तरवाली स्त्री में क्रमश: एक वर्ण की अनन्तरवाली जैसे ब्राह्मण से वैश्या में, क्षत्रिय से शूद्रा में, दो वर्णो की अनन्तरवाली जैसे ब्राह्मण से शूद्र में उत्पन्न पुत्र का विधान यह (आगे कहा हुआ) समझना चाहिये।
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