(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) अनन्तर वर्णवाली स्त्रियो में उत्पन्न पुत्रों का यह सनातन विधान है। एक या दो वर्णो के अनन्तरवाली स्त्री में क्रमश: एक वर्ण की अनन्तरवाली जैसे ब्राह्मण से वैश्या में, क्षत्रिय से शूद्रा में, दो वर्णो की अनन्तरवाली जैसे ब्राह्मण से शूद्र में उत्पन्न पुत्र का विधान यह (आगे कहा हुआ) समझना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।