व्रात्यात्तु जायते विप्रात्पापात्मा भृज्जकण्टकः ।
आवन्त्यवाटधानौ च पुष्पधः शैख एव च ।।
'ब्रात्य' (१०।२०) संज्ञक ब्राह्मण से ब्राह्मणी में 'भूर्णकण्टक' संज्ञक पापी पुत्र उत्पन्न होता है। देशभेद से इसी के “आवन्त्य; वाटधान, पुष्पध और शैख" संज्ञाएँ भी हैं।
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