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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 76
षण्णां तु कर्मणामस्य त्रीणि कर्माणि जीविका । याजनाध्यापने चैव विशुद्धाच्च प्रतिग्रहः ।।
इन ६ (१०।७५) कर्मा में से तीन कर्म - साङ्ग वेदाध्यापन, यज्ञ कराना और विशुद्ध से (द्विजमात्र से, शूद्र से नहीं), दान लेना ब्राह्मण की जीविका के लिए है।
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