जिस कारण बीज के प्रभाव से तिर्यग् योनि (हरिणी आदि) में उत्पन्न (ऋष्य-श्रङ्ग आदि) पवित्रता से ऋषि, नमस्कारादि के योग्य होने से पूजित तथा ज्ञान प्राप्ति करने से श्रेष्ठ हुए इस कारण बीज (वीर्य) ही श्रेष्ठ माना जाता है।
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