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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 53
न तैः समयमन्विच्छेत्पुरुषो धर्ममाचरन्‌ । व्यवहारो मिथस्तेषां विवाहः सदृशैः सह ।।
धर्माचरण करने वाला मनुष्य इन (चण्डाल तथा श्वपाक कों-१०।१२, १९) के साथ बातचीत न करें, उन्हें मत देखें और उनका व्यवहार (लेन-देन तथा विवाह आदि) अपनी जाति वालों के साथ ही होवे।
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