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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 113
सीदद्धिः कुप्यमिच्छद्धिर्धनं वा पृथिवीपतिः । याच्यः स्यात्स्नातकैविंप्रैरदित्संस्त्यागमर्हति ।।
धन-धान्य के अभाव से दुःखित परिवार वाले अतएव भोजन, वस्त्र तथा यज्ञादि कार्य के लिए सोना-चाँदी आदि धन चाहने वाले स्नातक को राजा (क्षत्रिय) से भी याचना करनी चाहिये और यदि वह (कृपणता आदि से) नहीं देना चाहे तो उससे (याचना करने) का त्याग कर देना चाहिये।
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