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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 23
वैश्यात्तु जायते व्रात्यात्सुधन्वाचार्य एव च । कारुषश्च विजन्मा च मैत्रः सात्वत एव च ।।
व्रात्य/ (१०।२०) संज्ञक वैश्य से वैश्या में उत्पन्न पुत्र “सुधन्वाचार्य (सुधन्वा तथा आचार्य), कारुष, विजन्मा, मैत्र और सात्वत” संज्ञक होता है। (ये सब संज्ञाएँ देशभेद से एक ही पुत्र की है।)
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