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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 114
अकृतं च कृतात्क्षेत्रादृगौरजाविकमेव च । हिरण्यं धान्यमन्नं च पूर्व पूर्वमदोषवत्‌ ।।
जोती हुई भूमि की अपेक्षा बिना जोती हुई भूमि, गौ, बकरी, भेड, सोना, धान्य (कच्चा-विना सिद्ध हुआ-अन्न) और पकाया (सिद्ध) हुआ अन्न, इनमें से पूर्वपूर्व निर्दोष अर्थात्‌ कम दोषवाला है।
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