अकृतं च कृतात्क्षेत्रादृगौरजाविकमेव च ।
हिरण्यं धान्यमन्नं च पूर्व पूर्वमदोषवत् ।।
जोती हुई भूमि की अपेक्षा बिना जोती हुई भूमि, गौ, बकरी, भेड, सोना, धान्य (कच्चा-विना सिद्ध हुआ-अन्न) और पकाया (सिद्ध) हुआ अन्न, इनमें से पूर्वपूर्व निर्दोष अर्थात् कम दोषवाला है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।