अपने-अपने कर्म में तत्पर तीनों (ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य) वर्ण वाले द्विज (वेद को) पढ़ें तथा ब्राह्मण उन तीनों वर्णो को पढ़ावें, दूसरे दोनों (क्षत्रिय तथा वैश्य) वर्ण नहीं पढ़ावें ऐसा शास्त्रीय निर्णय है ।
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