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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 92
सद्यः पतति मांसेन लाक्षया लवणेन च । त्र्यहेण शूद्रो भवति ब्राह्मणः क्षीरविक्रयात्‌ ।।
(आपत्ति में पड़ा हुआ भी ब्राह्मण) मांस, लाख और नमक को बेचने से तत्काल पतित (के तुल्य) होता है और दूध बेचने से तीन दिन में शूद्र (के तुल्य) होता है।
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