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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 48
मत्स्यघातो निषादानां त्वष्टिस्त्वायोगवस्य च । मेदान्ध्रचुञ्जुमहूनामारण्यपशुहिंसनम्‌ ।।
निषादों (१०।८) का मत्स्यकार्य (मछली मारना आदि), आयोगव (१०।१२) का बढ़ईगिरी, “भेद तथा आन्भ्र' (१०।३६) एवं 'चुञ्चु' तथा 'मद्रु' जाति वालों का जङ्गली पशुओं को मारना-- (कर्म है)।
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