आयोगवश्च क्षत्ता च चण्डालश्चाधमो नृणाम् ।
प्रातिलोम्येन जायन्ते शूद्रादपसदास्त्रयः ।।
शूद्र से प्रतिलोमक्रम से (नीचवर्ण के पुरुष से उच्चवर्ण की कन्या में) उत्पन्न “आयोगव, क्षत्ता तथा चण्डाल” संज्ञक पुत्र शूद्र की अपेक्षा हीन तथा मनुष्यं में अधम होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।