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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 51
चण्डालश्वपचानां तु बहिरग्रामात्प्रतिश्रयः । अपपात्राश्च कर्तव्या धनमेषां श्वगर्दभम्‌ ।।
'चण्डाल' (१०।१२) तथा 'श्रपच' (१०।१९) गाँव के बाहर निवास करें, अपपात्र हों, उनका धन कृत्ते तथा गधे हों (बैल, गाय, घोड़ा आदि नहीं)।
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