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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 55
दिवा चरेयुः कार्यार्थं चिह्निता राजशासनैः । अबान्धदं शवं चैव निर्हरेयुरिति स्थितिः ।।
राजाज्ञा से चिहविशेष धारण किये हुए ये (चण्डाल तथा श्वपाक-१०। १२, १९) काम के लिए दिन में घूमें और बन्धु-बान्धवों से रहित (लावारिस) मुर्दे को गाँव से बाहर (श्मशानों में) ले जावें, यह (शस्त्रोक्त) मर्यादा है।
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