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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 14
पुत्रा येऽनन्तरस्रीजाः क्रमेणोक्ता द्विजन्मनाम्‌ । तानन्तरनाम्नस्तु मातृदोषात््रचक्षते ।।
द्विजों (१०।४) से अनन्तर (ब्राह्मण से क्षत्रिया में क्षत्रिय से वैश्या में तथा वैश्य से शूद्र में), एकान्तर (ब्राह्मण से वैश्य में तथा क्षत्रिय से शूद्र में) और द्वयन्तर (ब्राह्मण से शूद्रा में) वर्णवाली स्त्रियो में उत्पन्न पुत्र जो कहे गये हैं; मातृदोष (माता की नीचवर्णता) से उत्पन्न उनके संस्कार आदि माता की जाति के अनुसार ही मन्वादि महर्षियों ने बतलाया है।
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