क्षत्ता (१०1१२), उग्र (१०।९) और पुक्कसो (१०1१८) का विल में रहने वाले (गोह, खरगोश आदि) जीवों को मारना या फँसाना, 'धिग्वणों' बाजाओं को बजाना ये कर्म है।
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