मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 49
न्रुग्रपुक्रसानां तु बिलौको वधबन्धनम्‌ । धिग्वणानां चर्मकार्यं वेणानां भाण्डवादनम्‌ ।।
क्षत्ता (१०1१२), उग्र (१०।९) और पुक्कसो (१०1१८) का विल में रहने वाले (गोह, खरगोश आदि) जीवों को मारना या फँसाना, 'धिग्वणों' बाजाओं को बजाना ये कर्म है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें