प्रकल्प्या तस्य तैर्वृत्तिः स्वकुटुम्बाद्यथार्हतः ।
शक्ति चावेक्ष्य दाक्ष्यं च भृत्यानां च परिग्रहम् ।।
ब्राह्मणों को चाहिये कि वे अपनी सेवा करने वाले शूद्र के लिए उसके काल करने की शक्ति, उत्साह और परिवार के निर्वाह के प्रमाण को (विचारकर तदनुसार) उसकी जीविका निश्चित कर दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।