मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 37
चाण्डालात्पाण्डुसोपाकस्त्वक्सारव्यवहारवान्‌ । आहिण्डिको निषादेन वैदेह्यामेव जायते ।।
'वैदेह" (१०।१७) जाति वाली स्त्री में 'चण्डाल' (१०।१२) जाति वाला पुरुष बांस के व्यवहार से जीविका करने वाले “पाण्डुसोपाक" संज्ञक जाति वाले पुत्र को उत्पन्न करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें