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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 119
स्वधर्मो विजयस्तस्य नाहवे स्यात्पराङ्मुखः । शस्त्रेण वैश्याद्‌ रक्षित्वा धर्म्यमाहारयेद्वलिम्‌ ।।
विजय पाना राजाओं का अपना धर्म है (प्रजा की रक्षा करते हुए भी यदि राजा को कहीं से भय कारक उपस्थित हो जावे तो उसे) युद्ध से (डरकर) विमुख नहीं होना चाहिये और शस्त्रों से वैश्यों की रक्षा कर उनसे आगे (१०।१२०) कहे हुए धर्मयुक्त कर को (आप्त पुरुषों के द्वारा) ग्रहण करना चाहिये।
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