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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 30
यथैव शूद्रो ब्राह्मण्यां बाह्र जन्तुं प्रसूयते । तथा बाह्यतरं बाह्यश्चातुर्वण्ये प्रसूयते ।।
जिस प्रकार शूद्र पुरुष ब्राह्मणी में सर्वथा त्याज्य 'चण्डाल' (१०।१२) जाति वाली सन्तान को उत्पन्न करता है, उसी प्रकार चण्डाल भी ब्राह्मणी आदि चारों वर्ण वाली स्त्रियों में अपने से भी अधिक हीन सन्तान को उत्पन्न करता हैं।
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