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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 33
मैत्रेयकं तु वैदेहो माधूकं सम्प्रसूयते । नृन्प्रशंसत्यजस्रं यो घण्टाताडोऽ रुणोदये ।।
"वैदेह" (१०।११ जाति वाला पुरुष 'आयोगव') (१०।१२) जाति वाली स्त्री में “मैत्रेयक" संज्ञक जाति वाले मधुरभाषी पुत्र को उत्पन्न करता है, जो प्रातःकाल घण्टा बजाकर राजा आदि बड़े लोगों की स्तुति करता हुआ जीविका करता है।
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