अध्याय 7 — सप्तमोल्लासः
कुलार्णव
64 श्लोक • केवल अनुवाद
'सुलक्षणा' शक्ति वह है, जो सुन्दर रूप वाली, तरुणी, शान्ता, कुलाचार परायणा, पवित्रा, शङ्कत से हीन, भक्तियुता, गूढ़ रहस्य-युता, शास्त्र को मानने वाली, लोभहीना, सुशीला, जिसके मुख पर मुस्कान हो, मधुरभाषिणी, गुरु और देवता की भक्ति से युक्त, अच्छे विचार बाली, कौलिकों को चाहने वाली, ईर्ष्या एवं द्वेष से रहिता, विशेष बातों की जानने वालो, देवाराधन में रुचि रखने वाली, मनोहरा और सदाचारिणी हो।
जो शक्ति दुष्टा, उग्रा, कर्कशा, क्रूरा, दुःखिता, कुल को दूषित करने वाली, दुराचारिणी, पराधीना, डरी हुई, लोभिनी, व्याकुला, आलसी, निद्रा में रुचि रखने वाली, दुर्बुद्धि वाली, अङ्गहीना, रोगिणी, दुर्गन्धा, कुरूपा, मूर्खा, बूढ़ी, पगली, रहस्य की बातों को भी कहने वाली, कुतर्किणी, गन्दी बात करने वाली, निर्लज्जा, झगड़ालू, विकृत रूप वाली, गलत मार्ग पर चलने वाली, चुप रहने वाली, लँगड़ी, अन्धी, विकृत मुख वाली हो, वह मन्त्रयुक्ता भी हो, तो उसे पूजायाग में न रखे।