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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 8
तारत्रयं ततः सर्वयोगिनीभ्यः पदं वदेत् । तत्पश्चात् सवर्भूतेभ्यः सर्वभूताधिवर्त्ति च ॥ पदं ताभ्यो डाकिनीभ्यः शाकिनीभ्यः पदं वदेत् । त्रैलोक्येति पदं चैव वासिनीभ्य इमां वदेत् ॥ पूजां बलिं गृहणयुग्मं स्वाहान्तो योगिनीमनुः । कथितोऽयं महेशानि मन्त्रः पञ्चादशाक्षरः ॥ या काचिद् योगिनी रौद्रा सौम्या घोरतरा परा । खेचरी भूचरी व्योमचरी प्रीतास्तु मे सदा ॥
ॐ ॐ ॐ सर्वयोगिनीभ्यः सर्वभूतेभ्यः सर्वभूताधिवर्त्तिताभ्यः डाकिनीभ्यः शाकिनीभ्यः त्रैलोक्यवासिनीभ्यः इमां पूजां बलिं गृहण गृहण स्वाहा। हे महेशानि! यह ५० अक्षरों का योगिनीमन्त्र कहा गया है। इससे बलि देकर निम्न मन्त्र से प्रार्थना करे:- या काचिद् योगिनी रौद्रा सौम्या घोरतरा परा । खेचरी भूचरी व्योमचरी प्रीतास्तु मे सदा ॥
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