कुलदीप के लक्षण और मन्त्र - वटुकादि का पूजन कर कुलदीपों का अर्चन करे। चार अंगुल बड़े डमरु के आकार के तीन कोने वाले सुन्दर नौ, सात या पाँच दीपक हलके लाल रंग के आटे से बनाये। दीपक ऐसे हों कि उनमें एक कर्ष (तोला) घी आ जाय। फिर अन्तस्तेज को बहिस्तेज से मिलाते हुए अमित प्रभा वाले कुलदीपकों को तीन बार देवी के ऊपर घुमाकर इस मन्त्र से निवेदित करे:-
समस्तचक्रचक्रेशि ! देवेशि। सकलात्मिके ! आरात्रिकमिदं देवि ! गृहाण मम सिद्धये ॥
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