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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 4
वटुकादीन् यजेत्तस्माद् गन्धपुष्यासवामिषैः । तत्तन्मन्त्रविधानेन देवता प्रीतिमाप्नुयात् ॥
अतः बटुकादि का उनके मन्त्रविधान से गन्ध, पुष्प, अमृत, आसव और आमिष से पूजन कर देवता की प्रसन्नता को प्राप्त करे।
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