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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 26
दुष्टोमा कर्कशा क्रूरा दुःखिता कुलदूषणी । दुराचारा पराधीना भीता लुब्धातुराऽलसा ॥ निद्रासक्तातिदुम्र्मेधा हीनाङ्गी व्याधिपीडिता । दुर्गन्धा कुत्सिता मूढा वृद्धोन्मत्ता रहस्यभित् ॥ कुतर्का कुत्सितालापा निर्लज्जा कलहप्रिया । विरूपोन्मार्गगा स्तब्धा पङ्ग्वन्धविकृतानना । ईदृशीं मन्त्रयुक्ताञ्च शक्तिं यागे विवर्जयेत् ॥
जो शक्ति दुष्टा, उग्रा, कर्कशा, क्रूरा, दुःखिता, कुल को दूषित करने वाली, दुराचारिणी, पराधीना, डरी हुई, लोभिनी, व्याकुला, आलसी, निद्रा में रुचि रखने वाली, दुर्बुद्धि वाली, अङ्गहीना, रोगिणी, दुर्गन्धा, कुरूपा, मूर्खा, बूढ़ी, पगली, रहस्य की बातों को भी कहने वाली, कुतर्किणी, गन्दी बात करने वाली, निर्लज्जा, झगड़ालू, विकृत रूप वाली, गलत मार्ग पर चलने वाली, चुप रहने वाली, लँगड़ी, अन्धी, विकृत मुख वाली हो, वह मन्त्रयुक्ता भी हो, तो उसे पूजायाग में न रखे।
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