एवं तत्त्वत्रयज्ञानं गुरोर्शात्वा य आचरेत् ।
स जीवन्नेव मुक्तः स्यादिति शङ्करभाषितम् ॥
इस प्रकार गुरु से तत्त्वत्रय को जानकर जो व्यवहार करता है, वह जीवित ही मुक्त होता है यह शङ्कर (शास्त्र) वचन है।
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