आनंन्दात्तृप्यते देवी मूर्च्छया भैरवः स्वयम् ।
वमनात् सर्वदेवाश्च तस्मात्रिविधमाचरेत् ॥
आनन्द से देवी तृप्त होती है, मूर्च्छा से स्वयं भैरव और वमन से सभी देवता तृप्त होते हैं। अतः तीनों को संतृप्त करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।