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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 33
सव्येनोद्धृत्य पात्रन्तु मुद्रां कृत्वाऽपसव्यतः । यथाविधि द्वितीयेन गृह्णीयान्मन्त्रमुच्चरन् ॥
दाहिने हाथ से पात्र को उठाकर बाएँ हाथ से मुद्रा बनाकर द्वितीय तत्त्व के साथ यथाविधि मन्त्रोच्चारण करते हुये उसे ग्रहण करे।
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