सर्वभूतपति बलि के मन्त्र - ॐ ॐ ॐ सर्वभूतेभ्यः सर्वभूतपतिभ्यो स्वाहा। यह १७ अक्षरों का मन्त्र है। इससे बलि देकर प्रार्थना करे:-
भूता ये विविधाकारा दिव्या भौमान्तरिक्षगाः ।
पातालसंस्था ये केचिच्छिवयोगेन भाविताः ।।
ध्रुवांद्याः सत्यसन्धाश्च इन्द्राद्याः स्वर्व्यवस्थिताः ।
तृप्यन्तु प्रीतमनसः प्रतिगृह्णन्त्विमं बलिम् ।।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।