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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 9
तारत्रयं वदेत् सर्वभूतेभ्यः सर्व एव हि। पश्चाद् भूतपतिभ्यो हृद्युक्तः सप्तदशाक्षरः ॥ भूता ये विविधाकारा दिव्या भौमान्तरिक्षगाः । पातालसंस्था मे केविच्छिवयोगेन भाविताः ॥ ध्रुवाद्याः सत्यसन्धाश्च इन्द्राद्याः स्वर्व्यवस्थिताः । तृप्यन्तु प्रीतमनसः प्रतिगृह्णन्त्विमं बलिम् ॥
सर्वभूतपति बलि के मन्त्र - ॐ ॐ ॐ सर्वभूतेभ्यः सर्वभूतपतिभ्यो स्वाहा। यह १७ अक्षरों का मन्त्र है। इससे बलि देकर प्रार्थना करे:- भूता ये विविधाकारा दिव्या भौमान्तरिक्षगाः । पातालसंस्था ये केचिच्छिवयोगेन भाविताः ।। ध्रुवांद्याः सत्यसन्धाश्च इन्द्राद्याः स्वर्व्यवस्थिताः । तृप्यन्तु प्रीतमनसः प्रतिगृह्णन्त्विमं बलिम् ।।
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