पान करने का मन्त्र:-
इदं पशुपाशसमुच्छेदकारणं पवित्रममृतं पिबामि भवभेषजम् । भैरवोदितम् ॥
चित्ते स्वातन्त्र्यसारत्वात् तदानन्दमयात्मनः । तन्मयत्वाच्च भावानां भावश्चान्तर्हिता रसे ॥
सुषुम्नान्तं विकाशाय सुरसंस्तेन पीयते । तस्मादिमां सुरां देवीं पूणर्णोऽहं त्वां पिबाम्यहम् ॥
हे देवेशि! इस मन्त्र और मूलमन्त्र का उच्चारण कर स्थिर म. से धीरे-धीरे साधक अलिपान करे ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।