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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 23
तन्त्रमन्त्रसमायुक्ता समयाचारपालिका ॥ कुमारी च व्रतस्था च योगमुद्राघरापि वा । पूजाकाले स्वतः प्राप्ता सा ज्ञेया सहजा बुधैः ॥
तन्त्र-मन्त्र की ज्ञाता, समयाचार का पालन करने वाली, कुमारी अथवा व्रतधारिणी या योगिनी जो शक्ति पूजाकाल में स्वयं ही उपस्थित हो जाय, विद्वानों द्वारा वह 'सहजा' शक्ति कही गई है।
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