कुलदीपों को प्रदर्शित कर साधक अब शक्ति की पूजा करे। स्वशक्ति या वीरशक्ति या विशेष रूप से दीक्षित शक्ति को पान कराकर साधक गुरु परम्परा से स्वयं पान करे। यह शास्त्र का निर्णय है।
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